child crime: बच्चों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराध

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child crime: झारखंड में बच्चों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराध, जाननेवालों से ज्यादा खतरा, आंकड़ें कर देंगे हैरान झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. 2022 में पूरे देश में 1,62, 449 अपराध बच्चों के खिलाफ दर्ज हुए. वहीं अकेले झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल केस 1917 और कुल पीड़ित 1984 दर्ज हैं. NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान खुद अपने जाननेवालों ने पहुंचाया है.

झारखंड में बच्चों के खिलाफ लगातार अपराध बढ़ रहा है. नेशनल क्राइम रिकॉडर्स ब्यूरो (एनसीआरबी) ने वर्ष 2022 की जारी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2020 व 2021 की तुलना में झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले बढ़े हैं. वर्ष 2020 में 1795, 2021 में 1867 और 2022 में 1917 केस दर्ज किये गये हैं. एनसीआरबी के मुताबिक 2022 में 1917 केस में 1984 पीड़ित बच्चे हैं. रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के अपहरण के कुल 650 मामले सामने आये हैं. इनमें 652 बच्चे पीड़ित हैं. बच्चों की खरीद-फरोख्त के भी 321 मामले सामने आये हैं. वहीं बच्चों की तस्करी के 114 और रेप के 184 मामले राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं. वहीं पोक्सो एक्ट के कुल 884 केस दर्ज हुए हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान खुद अपने जाननेवालों ने पहुंचाया है. इनमें 562 जाननेवाले, पांच पारिवारिक सदस्य, 333 पारिवारिक मित्र और नजदीकी के अलावा दोस्त व ऑनलाइन फ्रेंडस की संख्या 224 है. वहीं आठ अज्ञात लोगों ने बच्चों के साथ गलत किया है. वर्ष 2022 तक बच्चों से जुड़ा 5451 केस ट्रायल के लिए लंबित थे.

2020 और 2021 की तुलना में 2022 में झारखंड में बढ़े अपराध 2022 में पूरे देश में 1,62, 449 अपराध बच्चों के खिलाफ हुए दर्ज

यानी पिछले साल हर घंटे बच्चों के खिलाफ औसतन 18 अपराध हुए 2022 में झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध- कुल केस 1917, कुल पीड़ित 1984

केस 1 – शिक्षक के थप्पड़ मारने से बच्चे के कान का पर्दा फटा

child crime: डोरंडा थाना क्षेत्र के मास्टर कपाउंड, कुसई चौक स्थित एक प्राइमरी स्कूल के शिक्षक पर सात वर्षीय छात्र कुणाल दत्ता के साथ मारपीट कर कान का पर्दा क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में छात्र की मां बनानी दत्ता ने डोरंडा थाना में शिकायत दर्ज करायी है. आवेदन में बनानी दत्ता का कहना है कि उनका पुत्र पहली कक्षा में पढ़ता है. वह अपने पुत्र को स्कूल लेने गयी थी, उसी समय उनके पुत्र ने कान में दर्द की बात बतायी. उसने बताया कि उसे स्कूल के शिक्षक ने कान में मारा है. बनानी दत्ता पुत्र को लेकर कान के डॉक्टर के पास गयी, तो डॉक्टर ने बताया कि उनके पुत्र का कान क्षतिग्रस्त हो गया है. उसके बाद उन्होंने डोरंडा थाना में आवेदन दिया है. पुलिस ने सनहा दर्ज कर लिया है. छात्र की मां ने आवेदन के साथ डॉक्टर के दिखाने का पर्ची भी जमा किया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

केस 2 – 15 वर्षीया नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म

रांची के तुपुदाना हुलहुंडु चर्च के पास से 15 साल की नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ गैंग रेप किया गया. वह अपने प्रेमी से मिलने के लिए खूंटी से रांची आयी थी. लेकिन शनिवार की रात को प्रेमी के साथ उसकी कुछ अनबन हो गयी और वह उसके घर से बाहर निकल कर सड़क पर आ गयी. नाबालिग को अकेली देखकर बाइक सवार तीन युवकों ने उसका अपहरण कर लिया. फिर उसे खरसीदाग स्थित एक सुनसान किस्की गांव के चुकरु जंगल में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया.

केस 3 – सात साल के बच्चे को किया था अगवा

child crime: सुखदेवनगर थाना क्षेत्र स्थित गंगानगर के रोड नंबर दो से कृष्णा मिश्रा (साढ़े सात साल) को अगवा किया गया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया. कृष्णा के अपहरण के बाद रांची एसएसपी ने टीम का गठन किया था. टीम ने तुपुदाना ओपी क्षेत्र के चितवादाग से बच्चे को बरामद कर लिया. मामले के तीन साजिशकर्ताओं को भी पुलिस ने गिरफ्तार भी किया. बच्चे की मां ने दो युवकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

केस 4 – बच्चे का अपहरण कर हत्या की

राजधानी के एदलहातू इलाके से इस साल मार्च महीने में अपहरण कर एक बच्चे की हत्या कर दी गयी थी. उसका शव रांची के ही नगड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत सपारोम गांव स्थित तालाब से बरामद किया गया था. वारदात के बाद शहर के बरियातू-एदलहातू इलाके में सनसनी फैल गयी थी.

child crime: लोगों ने जतायी चिंता

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की सुरक्षा आज कल के अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों की हर पल मॉनिटरिंग करें. बच्चे क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं और किनसे मिल रहें, इन सब पर नजर रखें. डिजिटल जमाने में आज कल बच्चों का दोस्त स्मार्ट फोन बन गया है. स्मार्ट फोन बच्चों को बिगाड़ भी रहा है. ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि उनके दोस्त बनें और बच्चों से बातें करें – नीता नारायण, समाजसेवी

child crime: बच्चों को हेल्पलाइन की जानकारी दें

अभिभावकों को चाहिए कि बच्चे कहा जा रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी लें. अभिभावकों को बच्चों के हर फ्रेंडस की जानकारी भी होनी चाहिए. बच्चे जब भी बाहर जायें, तो फोन से या जिनके घर जा रहे हैं, उनसे लगातार संपर्क में रहना चाहिए. बच्चों को घटनाओं अथवा आपबीती के बारे में उदाहरण देकर या कहानियों के माध्यम से बतायें. हर अभिभावक को अपने बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन एवं अन्य हेल्पलाइन की जानकारी अवश्य देनी चाहिए. जिससे जब जरूरत हो, बच्चे उसका प्रयोग कर सके. – शोमा देवघरिया,

child crime: अपने हाथों में है बच्चों की सुरक्षा

बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले अपने हाथों में है. आप अपने बच्चों को सही और गलत की परिभाषा समझायें. बच्चों को हमेशा समसामयिक घटनाओं के बारे में बतायें. आज कल परिवार छोटे हो गये हैं. ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय दें. बच्चों से बाते करें. हर दिन की गतिविधियों के बारे में बच्चों से जानकारी लें. बच्चों को परेशानी में देखकर उनसे दोस्त की तरह पेश आयें. – रंजना तिवारी, अभिभावक

child crime: बच्चों को वक्त देना सीखें

child crime: बच्चों के हाव-भाव को देख कर आप समझ सकते हैं कि आपका बच्चा क्या कर रहा है. अपने बच्चों को हमसे ज्यादा कोई नहीं जानता. यदि आपको अपने बच्चे के व्यवहार में कोई परिवर्तन दिख रहा हो, तो उससे फौरन बात करें. बच्चों को वक्त देना सीखें. आज कल अभिभावक कामकाजी हो गये हैं. मां भी बच्चों को समय नहीं दे पाती हैं. ऐसे में हर दिन अपने बच्चों को क्वॉलिटी टाइम दें. उनसे उनके जीवन से जुड़ी हर बात को शेयर करने की शुरू से आदत डालें. – रेखा देवी

कामकाजी महिला बच्चों की सुरक्षा के लिए सीबीएसइ ने जारी की है गाइडलाइन राजधानी रांची के स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षाविदों के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार मंथन चल रहा है. सीबीएसइ की ओर से भी गाइडलाइन जारी की गयी है. इसे लेकर समय-समय पर शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया जाता है. पेश है उनकी राय.

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