de-listing: डी-लिस्टिंग रैली में आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद

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de-listing: राज्य के कोने-कोने से जुटे आदिवासी, जानेवालों का आरक्षण बंद करने की मांग

रांची, झारखंड: लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष सह खूंटी के पूर्व सांसद, पद्मश्री कड़िया मुंडा ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आयोजित डी-लिस्टिंग रैली में आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की।

de-listing: मुंडा का संवाद

कड़िया मुंडा ने कहा, “आदिवासियों के अधिकारों पर हो रहा कब्जा ठीक नहीं है, और इस लड़ाई में आदिवासियों को जागरूक करने की आवश्यकता है। अगर आदिवासी अभी भी जागरूक नहीं होते हैं, तो आनेवाली पीढ़ी आदिवासी को किताबों में पढ़ना होगा।”

रैली में उठी मांग

de-listing: रैली में, जो झारखंड समाज सुरक्षा मंच की शाखा ने आयोजित की थी, लाखों आदिवासी एकत्र होकर सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।

समाज के सभी क्षेत्रों से जुटे आदिवासी

रैली में, झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से लोग एक साथ आए और आरक्षण बंद करने की मांग की। इस अभियान में समाज के सभी वर्गों से लोग शामिल हुए और एक जुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया।

de-listing:सांसद की आगामी कदम

मुंडा ने बताया कि इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण के बारे में संविधान की धारा 342 में संशोधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल जनजातियों को ही मिलना चाहिए और धर्म बदलनेवालों को इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए।

रैली में रोका जाना का आरोप

de-listing: मुंडा ने बताया कि रैली में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम को सरकार ने कई स्थानों पर रोका गया है, जिससे वह राज्य सरकार की मंशा में खोट देखते हैं।

निष्कर्ष

de-listing: कड़िया मुंडा द्वारा शीर्षकित डी-लिस्टिंग रैली ने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और संविधान में संशोधन की मांग को और बढ़ावा दिया है। आने वाली दिनों में दिल्ली में होने वाली रैली में लाखों आदिवासी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए साक्री उतरेंगे।

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