mother’s day quotes : कवयित्री अंशिता सिन्हा की मार्मिक कविताएं ।

mother's day quotes

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  1. आखिरी झलक

अंतिम बार देखा था मैंने
बिल्कुल निश्चेष्ट, निष्प्राण
सफेद कपड़ों में लिपटी थी
मेरी माँ
चेहरे पर थी पुरसुकून शांति
पर जिंदगी अधूरी छोड़
जाने का थोड़ा मलाल भी
अपनों को बीच मझधार में
छोड़ने की कसक भी
आंखों में अधूरी ख़्वाहिशें लिए
विदा हो गयी सबसे
सोचती हूँ काश वक्त का पहिया
उल्टा घूम उसी राह पर ले जाता
जहां फिर से मिलता मुझे
उनका स्नेहिल स्पर्श
और पाकीजा आँचल का साया
काश मैं आंखें बंद करती
और पलक झपकते ही
मेरे सामने होती खड़ी
हंसती मुस्कुराती ममता से भरी
मेरी माँ…
अंशिता सिन्हा

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2. माँ तेरे बिन

तुम गयी तो ऐसा लगा
जैसे सर से साया चला गया
छांव में चलते-चलते अचानक
कड़ी धूप में आ गयी
तुम गयी तो ऐसा लगा
जैसे मेरा बचपन चला गया
रूठते मचलते अचानक मैं
क्यों बड़ी हो गयी
क्यों शरारतें और अठखेलियाँ
खामोश हो गयी
क्यों ममता की छांव से
महरूम हो गई
तुम गयी तो जैसे मेरी
खुशियां रुठ गयी
कुछ करने की हिम्मत टूटी
जिंदगी की अनमोल चीज जैसे छूट गयी
माँ तू क्यों मुझसे दूर गयी
इस गुड़िया से मुख मोड़ गयी
तेरे बिन जीना कितना मुश्किल है
हर आंसू पीना कितना मुश्किल है
कैसे कहूँ कैसे जीती हूँ
हर आंसू कैसे पीती हूँ
इन आँखों में है जाने कितने सवाल
सबका जबाव मैं खुद ही देती हूं
अब तो बस तेरी बातें मेरे साथ है
तेरी यादें ही मेरे साथ है।
अंशिता सिन्हा

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