recession in europe : यूरोपीय देशों में मंदी का दौर। जानिए भारत में कितना असर ?

recession in europe

recession in europe : वैश्विक मंदी की आहट और अमेरिका में छाए आर्थिक संकट के बीच अब यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी औपचारिक रूप से मंदी की चपेट में गिरफ्त में आ गई है । दैनिक जीवन के ज़रूरी सामानों की कीमतों में भारी उछाल आया है । 2023 की पहली तिमाही में जर्मनी की इकोनॉमी में अप्रत्याशित गिरावत आई है । संघीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा गुरूवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च में जर्मनी के जीडीपी में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई है । साल 2022 की आखिरी तिमाही में भी जर्मनी की जीडीपी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी । दो तिमाही में लगातार जीडीपी का नीचे आना तकनीकी रूप से मंदी में आता है । ये आंकड़े जर्मनी की सरकार के लिए बड़ा झटका है । जर्मनी के मंदी में होने की पुष्टि के कारण यूरो गुरुवार को तेजी से गिर गया, जबकि डॉलर, दो महीने के शिखर पर पहुंच गया.

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आगे होगी और परेशानी

दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों में चेतावनी दी है कि क्रय शक्ति में गिरावट, कमज़ोर औद्योगिक मांग, बढ़ती ब्याज़ दरें, साथ ही अमेरिका सहित अन्य देशों में आर्थिक विकास में मंदी आने वाले महीनों में जर्मनी की अर्थव्यवस्था को और कमज़ोर कर सकती है और आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा सकता है । हालांकि, दूसरी तिमाही में सुधार की उम्मीद है ।

कैसे आई आर्थिक मंदी

recession in europe : रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी के लोगों की क्रय शक्ति में गिरावट, इंडस्ट्रियल ऑर्डर बुक में कमी, आक्रामक मौद्रिक नीति का सख्ती से पालन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में छाई अपेक्षित मंदी ने मिलकर जर्मनी में मंदी ला दी है, जिससे वैश्विक मंदी में तेज़ी आ रही है । साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से पूरे यूरोप में ईंधन संकट खड़ा हो गया है । इस वजह से जर्मनी समेत कई देशों में महंगाई चरम पर है । वहां खाने-पीने की चीज़ों की भी कमी हो गई है । मार्च तिमाही के दौरान जर्मनी में उपभोग में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई है ।

भारत के लिए कितना खतरा ?

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि इस वित्त वर्ष भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) 6.5 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत क्रेडिट डिमांड और क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से इकॉनमी ग्रोथ करेगी। वहीं, गुरुवार को ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि इकॉनमी ने मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष में 7 फीसदी की दर से ग्रोथ की है।

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recession in europe : साथ ही भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही बड़ी इकॉनमी बना रहेगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा है कि सभी बड़े आर्थिक संकेत बता रहे हैं कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी से अधिक रहेगी। उन्होंने एक साल पहले शुरू हुई रेट हाइक साइकिल को भी डिफेंड किया और कहा कि अगर ग्रोथ रेट 7 फीसदी से अधिक रही तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा।

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