सहेली, एक अजब पहेली – माधुरी कुमारी

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1.

एक तस्वीर हो ऐसी
जो आईना सबको
एक सी दिखाए ।।

या हो एक आईना ऐसा
जिसमे जो भी झांके
वही नजर आए ।।

सखी,
वही आईना है जिसमें
झांकती है जो भी
तस्वीर तुम्हारी ही होती है ।।

या बन गई हो तुम
खुद ही आईना मेरा
या मैं बन गई हूं तुम
तुम्हें जीते जीते ।।

ऐसी कीमिया है सहेली
जो बनी सदियों से पहेली
अधूरा है बचपन
जिसके बिन ।।

और वो न भूल जाने वाले दिन भी
जब हर एक बात
बतानी होती थी तुम्हें
और हर कुछ
पूछना होता होता था तुमसे ।।

अब ये पचपन भी
जब मिलते हैं ,
जीते हैं उन बीते पलों को
फिर फिर से
अलमस्त दिनों को ।।

क्या है नहीं बांटने को अब ?
कोई पल जो जिंदा हो
सांसों में
चल रहा हो अभी का अभी ।।

न कोई बीती कहानी
न कोई आने वाला पल
बस हो तो यही पल
यही एक पल हो

भूल जाएं उम्र के पड़ाव को
और न कोई मंजिल हो
बस सफर हो
हां सफर हो
तो जी जाएंगे
मौत के पलों को भी
और हो जाएंगे उसके भी पार

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2.

मन के मंदिर में बिठाऊं
या ले चलूं कहीं दूर इन यादों की भीड़ से
जहां बस तुम हो और केवल तुम ही ।।
उतरने दो भावों को भीतर संपूर्णता में
जो जागती हैं मेरे भीतर
जब भी लिखती हूं तुम्हें
मैं जी जाती हूं सदियां
और जुटा लेती हूं ईंधन
मुस्कुराहट के
अगले कई कई सालों के लिए
क्योंकि, अब तो दूज के चांद से
ईद के चांद हो गए हो
पर हां,
जब भी मिलते हो
तो दिल कहता है
अभी वहीं खड़े हैं हम
जहां से शुरू की थी यात्रा
सीढ़ियों के पहले पायदान पर
जिंदगी ठहर गई है बर्फ सी
थोड़ी गुनगुनी धूप चाहिए
पिघलने को,
वो मिलता नहीं
बर्फ पिघलती नहीं
कैसे बने कहानी ?
धार बनती नहीं
और बूंद भाप बन उड़ जाती है हवा में
खो जाती है खुशबू की तरह
और हम आज तक ढूंढ रहे हैं उसे
खड़े हैं
ठगे से उसी मोड़ पर
मिल जाएंगे तुम्हे,
जहां छोड़ आए थे तुम ✍️
हां सखी इतनी ही कहानी है
अभी तो
रास्ता खत्म होता नहीं
राही थक जाते जाते हैं
चलते हैं फिर भी
अनवरत
कहीं पहुंचने को नहीं
चलने को
केवल चलने को
हां कहीं मिल जाए कोई ठंडी छांव
तो पुकार लेना
इसे भी
ठहर कर जी लेंगे पलों को
और समेट लेंगे
सारी मिठास
जो तुमने रोप रखे है,
अपने चारों ओर
हवा के झोंको सी
जब निकलते हो पास से
तो चुपके से कह जाती है
कैसे हो?
जब तक जवाब ढूंढती हूं
विदा हो जाते हो तब तक
जैसे जवाब चाहिए ही नहीं था
देनी थी सिर्फ थपकियां
और झकझोरना था
तंद्रा से मुझे
क्योंकि
हवाओं की मंजिल नहीं हुआ करती ।।

सप्रेम प्रस्तुति- माधुरी कुमारी

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